तलाक के लिए ग्राउंड्स (Grounds for Divorce) का मतलब क्या है?

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तलाक का मतलब है – पति और पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध का कानूनी अंत। लेकिन कोई व्यक्ति केवल इसलिए तलाक नहीं ले सकता कि अब साथ रहना मुश्किल है या मन नहीं करता।
भारतीय कानून तलाक की अनुमति केवल कुछ कानूनी “आधारों” (Grounds) पर देता है। ये आधार वे ठोस कारण हैं जिन्हें अदालत के सामने साबित करना पड़ता है कि विवाह अब जारी रखना असंभव है।

हर धर्म के लिए तलाक के आधार (grounds) अलग-अलग हैं, क्योंकि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदायों के लिए तलाक के अलग-अलग कानून लागू होते हैं।

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act) के तहत तलाक के आधार

धारा 13 (Section 13) में तलाक के लिए 10 प्रमुख आधार बताए गए हैं, जिन पर पति या पत्नी दोनों तलाक की अर्जी दे सकते हैं।

1. व्यभिचार (Adultery)

अगर पति या पत्नी में से किसी ने विवाह के बाद किसी अन्य व्यक्ति के साथ स्वेच्छा से यौन संबंध बनाया है, तो यह तलाक का वैध आधार है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर किया, लेकिन यह अब भी तलाक का कानूनी आधार है।

2. क्रूरता (Cruelty)

अगर किसी जीवनसाथी को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है, अपमानित किया गया है या दहेज आदि के लिए परेशान किया गया है, तो वह तलाक के लिए आवेदन कर सकता है।

जैसे – बार-बार गालियां देना, भोजन या पैसे से वंचित रखना, अपमानजनक व्यवहार, हिंसा, आदि।

3. परित्याग (Desertion)

अगर पति या पत्नी में से कोई एक व्यक्ति बिना किसी उचित कारण के लगातार कम से कम दो साल से अलग रह रहा है, तो दूसरा पक्ष तलाक की अर्जी दे सकता है।

4. धर्म परिवर्तन (Conversion of Religion)

यदि पति या पत्नी में से किसी ने हिंदू धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपना लिया है, तो यह तलाक का वैध कारण बन जाता है।

5. मानसिक विकार (Mental Disorder)

यदि पति या पत्नी में से कोई असाध्य मानसिक बीमारी या पागलपन से ग्रस्त है, जिससे साथ रहना असंभव हो गया है।

6. कुष्ठ रोग (Leprosy)

अगर कोई व्यक्ति गंभीर और असाध्य कुष्ठ रोग से पीड़ित है, तो दूसरा पक्ष तलाक मांग सकता है।

7. संक्रामक यौन रोग (Venereal Disease)

अगर जीवनसाथी एड्स जैसी संक्रामक बीमारी से ग्रस्त है, तो यह भी तलाक का आधार है।

8. सन्यास लेना (Renunciation of the World)

यदि किसी ने संन्यास लेकर संसार का त्याग कर दिया है, तो दूसरा जीवनसाथी तलाक की याचिका दायर कर सकता है।

9. सात वर्ष तक जीवित न होना (Not Heard Alive for 7 Years)

अगर कोई पति या पत्नी लगातार 7 वर्षों तक कहीं भी दिखाई नहीं दिया या उसके जीवित होने की कोई जानकारी नहीं है, तो उसे मृत माना जाता है और दूसरा जीवनसाथी तलाक की मांग कर सकता है।

10. सहवास (Cohabitation) की पुनर्स्थापना न होना

अगर अदालत ने “वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना” (Restitution of Conjugal Rights) का आदेश दिया था और एक साल तक भी पति-पत्नी साथ नहीं रहे, तो यह भी तलाक का आधार बनता है।

पत्नी के लिए विशेष तलाक के आधार

पत्नी को हिंदू विवाह अधिनियम में कुछ अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं:

  1. बलात्कार, सोडोमी या बेस्टियालिटी (Rape, Sodomy, Bestiality) –
    अगर पति ने पत्नी के साथ ऐसा व्यवहार किया है, तो पत्नी तलाक मांग सकती है।
  2. पति की दूसरी शादी (Bigamy) –
    अगर पति ने पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी कर ली है।
  3. कम उम्र में शादी (Underage Marriage) –
    अगर लड़की की शादी 15 वर्ष की उम्र से पहले हुई हो और उसने 18 वर्ष की उम्र पूरी करने से पहले विवाह अस्वीकार कर दिया हो।
  4. भरण-पोषण आदेश का पालन न करना –
    अगर पति अदालत के आदेश के बाद भी पत्नी को भरण-पोषण नहीं देता, तो पत्नी तलाक मांग सकती है।

मुस्लिम कानून के तहत तलाक के आधार

मुस्लिम महिला विवाह विघटन अधिनियम, 1939 के अनुसार, मुस्लिम महिला निम्न आधारों पर तलाक मांग सकती है:

  1. पति का चार साल तक अज्ञात ठिकाने पर रहना
  2. दो साल तक भरण-पोषण न देना
  3. सात साल या उससे अधिक की सजा होना
  4. वैवाहिक दायित्वों को पूरा न करना
  5. कम उम्र की शादी को अस्वीकार करना (15 वर्ष से पहले हुई हो)
  6. क्रूरता या हिंसा करना

मुस्लिम पुरुष तलाक, खुला, या मुबारत जैसे पारंपरिक तरीकों से विवाह समाप्त कर सकता है, परंतु अब यह सब कानून द्वारा विनियमित है।

ईसाई कानून के तहत तलाक के आधार

भारतीय तलाक अधिनियम, 1869 के तहत तलाक के मुख्य आधार हैं:

  1. व्यभिचार (Adultery)
  2. धर्म परिवर्तन (Conversion)
  3. मानसिक विकार, कुष्ठ रोग या संचारी रोग
  4. सात साल तक जीवित न होना
  5. क्रूरता या मानसिक पीड़ा देना
  6. सहवास की पुनर्स्थापना न होना

ईसाई पत्नियां अतिरिक्त आधारों पर भी तलाक मांग सकती हैं जैसे – पति द्वारा बलात्कार, सोडोमी या बेस्टियालिटी।

पारसी कानून के तहत तलाक के आधार

पारसी विवाह और तलाक अधिनियम, 1936 के अनुसार तलाक के आधार हैं:

  1. सात साल की अनुपस्थिति (Not heard alive)
  2. एक वर्ष में विवाह पूर्ण न होना
  3. पागलपन या मानसिक विकार
  4. पत्नी का विवाह से पहले किसी अन्य से गर्भवती होना
  5. व्यभिचार, बलात्कार या विकृत यौन व्यवहार
  6. क्रूरता या हिंसा
  7. कुष्ठ रोग या संक्रामक बीमारी
  8. पति का पत्नी को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर करना
  9. सात वर्ष या अधिक की कैद की सजा
  10. दो साल या उससे अधिक की अवधि के लिए परित्याग

संक्षेप में

धर्ममुख्य तलाक के आधार
हिंदूव्यभिचार, क्रूरता, परित्याग, धर्म परिवर्तन, मानसिक विकार, कुष्ठ, संक्रामक रोग, सन्यास, 7 वर्ष तक जीवित न होना
मुस्लिमक्रूरता, अनुपस्थिति, भरण-पोषण न देना, कैद, दायित्व न निभाना
ईसाईव्यभिचार, क्रूरता, धर्म परिवर्तन, मानसिक विकार, 7 वर्ष की अनुपस्थिति
पारसीअनुपस्थिति, व्यभिचार, क्रूरता, कुष्ठ, कैद, पत्नी की गर्भावस्था, वेश्यावृत्ति के लिए मजबूरी

निष्कर्ष

“तलाक के लिए ग्राउंड्स (Grounds for Divorce)” वे कानूनी कारण हैं जो अदालत को यह साबित करते हैं कि पति-पत्नी का विवाह अब खत्म हो चुका है और आगे साथ रहना संभव नहीं।
हर धर्म के अपने अलग कानून और प्रावधान हैं, लेकिन सभी का उद्देश्य एक ही है — न्यायपूर्ण ढंग से विवाह का अंत करना।

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