Supreme Court of India

सुप्रीम कोर्ट 21 जनवरी 2026 को सुनेगा मृत्युदंड की फांसी प्रणाली पर याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 21 जनवरी 2026 को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें मृत्युदंड के दोषियों को फांसी देने की मौजूदा व्यवस्था को खत्म कर कम दर्दनाक विकल्प अपनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया है कि “लीथल इंजेक्शन, गोली मारना, इलेक्ट्रोक्यूशन या गैस चैंबर” जैसे विकल्पों…

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Chhattisgarh High Court

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ईडब्ल्यूएस नीति पर स्पष्ट दिशा देने को कहा, लंबित याचिका पर भी ध्यान

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के तहत एक पारदर्शी और समयबद्ध नीति तैयार करे। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि राज्य…

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Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने रेंट कंट्रोलर का आदेश रद्द किया, कहा – अनधिकृत कब्जेदार ‘लीव टू डिफेंड’ के पात्र नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने किरायेदारी विवाद से जुड़े एक मामले में रेंट कंट्रोलर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें संपत्ति पर काबिज लोगों को ‘लीव टू डिफेंड’ (जवाब दाखिल करने की अनुमति) दी गई थी। अदालत ने कहा कि प्रतिवादी न केवल “अनधिकृत कब्जेदार” हैं बल्कि उन्होंने कोई भी विचारणीय मुद्दा (triable issue) नहीं…

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Andhra Pradesh High Court

मेडिकल लापरवाही मामलों में बीमा कंपनी न “आवश्यक” और न ही “उचित पक्ष” : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर 2025 को एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी अस्पताल या डॉक्टर को “पेशेवर क्षतिपूर्ति मेडिकल प्रतिष्ठान पॉलिसी” (Professional Indemnity Policy) देने वाली बीमा कंपनी को, मेडिकल लापरवाही से जुड़ी उपभोक्ता शिकायत में पक्षकार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि बीमाकर्ता न तो “आवश्यक पक्ष”…

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Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: पत्नी द्वारा मानसिक क्रूरता साबित, तलाक बरकरार, गुजारा भत्ता से भी इंकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम पारिवारिक विवाद में फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें एक वकील को अपनी पत्नी से मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की मंजूरी दी गई थी। अदालत ने पाया कि भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) की एक वरिष्ठ अधिकारी पत्नी ने लगातार अपमानजनक भाषा और अपमानजनक…

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मणिपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला: चेक पर हस्ताक्षर मात्र से कर्ज का अनुमान नहीं लगाया जा सकता

मणिपुर हाईकोर्ट ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act), 1881 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि धारा 139 के तहत कर्ज या देनदारी का अनुमान तभी लगाया जा सकता है जब शिकायतकर्ता पहले यह साबित कर दे कि कर्ज कानूनी रूप से वसूली योग्य है। केवल चेक पर…

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Local Law Network

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 76 वकीलों को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 20 अक्टूबर 2025 की अधिसूचना में 76 वकीलों को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया है। यह पदनाम अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16(2) के तहत दिया गया है और अधिसूचना के अनुसार यह नियुक्ति 16 अक्टूबर 2025 से प्रभावी मानी जाएगी। न्यायालय ने इस प्रतिष्ठित उपाधि के साथ…

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Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट ने अधिवक्ता महेश तिवारी के खिलाफ स्वतः संज्ञान कर अवमानना कार्यवाही शुरू की

झारखंड हाईकोर्ट महेश तिवारी अवमानना झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अधिवक्ता महेश तिवारी के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी। यह कार्रवाई तब हुई जब 16 अक्टूबर को न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अदालत में तिवारी और जज के बीच हुई तीखी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ…

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भारत में तलाक के लिए कानूनी नोटिस: प्रक्रिया, प्रारूप और कानूनी अधिकार

तलाक के लिए कानूनी नोटिस भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है जहाँ विवाह और तलाक के कानून विभिन्न धार्मिक परंपराओं से प्रभावित हैं। हर धर्म के लिए तलाक की प्रक्रिया अलग है — लेकिन हर तलाक का पहला कदम एक जैसा होता है: कानूनी नोटिस भेजना (Legal Notice for Divorce)। तलाक का कानूनी नोटिस एक औपचारिक…

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भारत में विवाह प्रमाण पत्र (Marriage Certificate): प्रक्रिया, दस्तावेज़ और महत्व

विवाह प्रमाण पत्र प्रक्रिया ( Marriage Certificate India ) भारत में विवाह केवल सामाजिक नहीं, बल्कि कानूनी दृष्टि से भी एक गंभीर संस्था है। शादी के बाद विवाह प्रमाण पत्र या Marriage Certificate एक ऐसा वैध कानूनी दस्तावेज होता है जो यह साबित करता है कि दो व्यक्ति पति-पत्नी के रूप में वैध रूप से…

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